Panchtithyo Ki Kahani (Panch bhikhu ki kahani) | पंचतिर्थियां की कहानी (पंच भीखुकी कहानी) | Aryavart Ki Kahaniya #aryavrat #kahaniya #Panchtithyo एक ब्राह्मण की बेटी थी।वह कार्तिक के महिने में सुबह-सुबह गंगाजी स्नान करती थी। वह पराये पुरुष का मुहं नहीं देखती थी। राजा का बेटा भी कार्तिक स्नान करने जाता था। राजा के बेटे ने मन में कहा कि मैं इतना जल्दी सुबह -सुबह आता हूँ तो भी मेरे से पहले कौन स्नान करके जाता है? कार्तिक महिने के पांच दिन रह गये। ब्राह्मण की बेटी स्नान करके आती राजा का बेटा स्नान करने के लिये जाता था।राजा के बेटे की पांव की आवाज सुनकर वह ब्राह्मण की बेटी जल्दी-जल्दी जाने लगी तो उस घटबडी मेंगले की माला वहां पर ही भूल गयी।राजा के बेटे ने वह माला नवी और मन में सोचा की यह माला इतनी सुन्दर है तो पहनने वाली कितनी सुन्दर होगी। ब्राह्मण की बेटी ने घर आकर ब्राह्मण से कहा कि मेरीमाला तो राजा का बेटाले गया। उसके पास जाकर मेरी माला लेकर आओ। ब्राह्मण ने राजा के बेटे को जाकर कहा कि मेरी बेटी की माला दो।राजा के बेटे ने कहा कि यह मालामें तबदंगा, जब तेरी बेटी मेरे महल में पांचरात आयेगी तबदूंगा।ब्राह्मण ने घर आकर बेटी से कहा-राजा के बेटे ने यह कहा है। जब बेटी बोली-मैं जाऊंगी। लेकिन राजा के बेटे को कहकर आओ कि मेरे आई हुई कि साख कौन भरेगा? ब्राह्मण जाकर राजा के बेटे को कहा। राजा का बेटा महल में तोता का पिंजरा लटका दिया और कहा कि तेरी साख यह तोता भरेगा। ब्राह्मण की बेटी पहन-ओढ़कर राजा के बेटे के महल में गई।जब कहा कि हे भगवान! मैं हर की पेढ़ी समझकर चढ़ी हूँ, पापी की पेढ़ी समझकर नहीं चढ़ी हूँ। पहली पेढ़ी में पांव रखा। जब प्रार्थना की-'"हे कार्तिक ठाकुर राय दामोदर पांचों पाण्डव, छठे नारायण, भीष्म राजा पापी को नींद आ जाना।" इतना कहकर वह राजा के बेटे के पलंग के पास से निकली, लेकिन उसको नींद आ गयी। ब्राह्मण की बेटी ने तोते से कहा कि तोता-तोता मेरी साखभरना।मेरी एकरात पूरी हो गयी है।इतना कहकर वह घर आ गई। राजा का बेटा उठा और तोते से पूछा कि वह कैसी थी? तोता बोला-आभा जैसी बिजली, हाली जैसी झल, कैल जैसी कामिनी, गुलाब जैसा रंग। जब राजा का बेटा बोला कि अभी तो चार रात बाकी हैं। आज तो मैं सो गया, लेकिन कल कांटे की सेज पर सोऊंगा।जो मझे नींद नहीं आयेगी। वह तो बारह बजते ही राजा के बेटे को नींद आगयी। ब्राह्मण की बेटी ने पहले कहा जैसे की जैसे कहकर महल में चढ़ गई। लेकिन राजा के बेटे को सोए हुए देखकर वापिस उतर गयी और तोते से कहा कि तुम मेरी साख भरना।आज मेरी दो रात पूरी हो गयी है। इतन कहकर वह घर आगई। राजा के बेटे को जागलगी।वह उठा और तोते पूछा कि वह आई, कैसी थी? जब सुवा ने बोला कि वह तो बहुत सुन्दर थी। ऐसे करते-करते तीसरी और चौथी रात भी बीत गई। पांचवीं रात आई, तब राजा के बेटे ने अंगुली पर चीरा लगाकर नमक भर दिया।बहत जलन हुई, हाय-हाय किया। नमस्कार दोस्तों 🙏🙏 कहानी कहने के बाद लप्सी तपसी की कहानी कही जाती है :- https://youtu.be/uGxyeQYBpDk धर्मराज जी की कथा :- https://youtu.be/1YWqt_pkBlE धर्मराज की कथा :- https://youtu.be/6ApM6NRj2RU राम लक्ष्मण की कहानी :- https://youtu.be/e4ArMg3L7Ic राई की कहानी :- https://youtu.be/jiAv03pF2uk सूरज भगवान की कहानी :- https://youtu.be/myymCNe8VUU सुखी अमावस्या की कहानी :- https://youtu.be/tv8U-slBQuI और Videos के लिये सब्सक्राइब करे : https://www.youtube.com/channel/UC6zU5hIzjDQ8I2jUxDFH5XQ?sub_confirmation=1 Facebook: - https://www.facebook.com/aryavat.ki.kahaniya/ Copyright Disclaimer: Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for "fair use" for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non-profit, educational, or personal use tips the balance in favor of fair use.
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