Mahalakshmi Vrat Katha | महाल क्ष्मी व्रत कथा | आर्यावर्त की कहानियां#aryavart #kahaniya #mahalakshmi प्राचीन काल में एक यशस्वी राजा थे ! एक बार उनकी पत्नी दमयंती ने अपनी सेविका को गले में गाँठ लगा पीला डोरा बाँधे देखा तो रानी दमयंती ने उस डोरे के बारे में पूछ ही लिया तो उसने उत्तर दिया, यह मां लक्ष्मी का डोरा है ! दमयंती ने पूछा इससे क्या होता है. सेविका ने कहा, इसके पहनने से घर में सुख सम्पत्ति आती है और पहले से हो तो और भी बढ जाती है1 रानी को अच्छा लगा. उसने भी एक डोरा ले कर 16 गांठे दे कर अपने गले में बाँध लिया. रात में राजा नल ने दमयंती से गले के पीले डोरे के बारे में पूछा तो रानी ने सारी बातें बता दीं, इस पर नल ने कहा, हमें किस बात की कमी है और उस डोरे को तोड कर फेंक दिया ! कुछ देर बाद राजा को सपने में एक औरत दिखी जो कह रही थी- ” मैं जा रही हूँ. उसी समय एक दूसरी औरत भी वहां आ गयी बोली मैं आ रही हूँ. नल को यही सपना बारह दिन तक रोज आता रहा तो वह उदास रहने लगा. दमयंती ने पूछा कि उदास क्यों हैं तो राजा ने कहा, समझ में नहीं आता वे दोनों औरतें कौन हैं. अगली बार राजा ने उन दोनों का नाम पूछा तो पहली बोली मैं लक्ष्मी हूँ और दूसरी ने अपना नाम दरिद्रा बताया. जल्द ही राजा नल को पता चला कि पखवारे भर के भीतर उनका सब धन जाता रहा है. नमस्कार दोस्तों 🙏🙏 कहानी कहने के बाद लप्सी तपसी की कहानी कही जाती है :- https://youtu.be/uGxyeQYBpDk धर्मराज जी की कथा :- https://youtu.be/1YWqt_pkBlE धर्मराज की कथा :- https://youtu.be/6ApM6NRj2RU राम लक्ष्मण की कहानी :- https://youtu.be/e4ArMg3L7Ic राई की कहानी :- https://youtu.be/jiAv03pF2uk सूरज भगवान की कहानी :- https://youtu.be/myymCNe8VUU सुखी अमावस्या की कहानी :- https://youtu.be/tv8U-slBQuI और Videos के लिये सब्सक्राइब करे : https://www.youtube.com/channel/UC6zU5hIzjDQ8I2jUxDFH5XQ?sub_confirmation=1 Facebook: - https://www.facebook.com/aryavat.ki.kahaniya/ Copyright Disclaimer: Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for "fair use" for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non-profit, educational, or personal use tips the balance in favor of fair use.
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