कार्तिक महिने की कथा | Kartik Mahine Ki Katha ( बाई और राम बाई )

 


Kartik Mahine Ki Katha | कार्तिक महिने की कथा ( बाई और राम बाई ) | आर्यावर्त की कहानियां #aryavrat #kahaniya #kartik एक राज बाई और एक राम बाई थे। कार्तिक का महिनाआया।वह कार्तिक स्नान करती थी और वह राजा के यहां नौकरी करती थी। जब राजा ने पूछा कि आप किसके नाम की कार्तिक स्नान करती हो।तब राज बाई ने कहा-मैं राज के लेखे कार्तिक स्नान करती हूँ और राम बाई को राजा ने पूछा तो राम बाई ने कहा-मैं तो राम के लेखे कार्तिक स्नान करती हैं। जब राजा राज बाई को रोज एक सोने का टका देते हैं और राम बाई को एक टका देते। ऐसे करते-करते कार्तिक महिना पूरा हो गया। जब राजा ने कहा कि गुप्तदान देना श्रेष्ठ होता है। राजा ने एक कोला मंगवाया। फिर उसे काटकर उसमें हीरा-मोती भर दिये।दूसरे दिन राज बाई राज में आई, जब राजा उसे वह कोला गुप्तदान में दे देते हैं और राम बाई को सोने काटका दे देते हैं। जब राज बाई मन में कहती है कि राजा रोज तो मुझे सोने का टका देते हैं और राम बाई को एक टका ही देते हैं।आज मुझे कोला देकर प्रसन्न कर दिया और राम बाई को सोने का टका दिया। जब राज बाई मन में पछतावा करके कोला मालण को चार टके में बेच देती है। चार टका लेकर राज बाई घर आ जाती है और ब्राह्मण भोजन करवाती है। राम बाई ने सोचा कि आज राजा ने मुझे सोने का टका दिया है तो खूब ठाट-बाट से ब्राह्मण भोजन करवा कर दक्षिणा दूंगी।जो बाजार से सब्जी लेकर जाऊं। राम बाई उसी मालण के पास जाकर पूछती है कि यह कोला कितने का है? बमालण बोलती है कि मैंने इसे चार टका में खरीदा है, अब इसे आठ में दूंगी।आठ टके में कोला लेकर रामबाई घर आती है।थाली चाकू इस कोला को राम बाई काटने लगती है तो खूब हीरा-पन्ना थाली ते हैं। जब वह तो बहुत प्रसन्न होती है और बहुत प्रसन्न मन से भोजन करवा कर दक्षिणा देती है और कहती है कि मुझे तो कार्तिक माता प्रसन्न हुई है। दूसरे दिन दोनों राज दरबार में जाती है, जब राजा राज बाई को पूछता है कि मैंने आपको कोला दिया उसका तुमने क्या किया? राज बाई डरते-डरते कहा कि आप तो हमेशा सोने का टका देते हो, लेकिन कल तो मुझे कोला दिया। इस कारण मैं कोला का क्या करती? उसको तो मैंने मालण को चार टके में बेच दिया।फिर राम बाई को राजा ने पूछा कि राम बाई आपने एक सोने के टके का क्या किया? राम बाई ने कहा कि मैंने तो कोला मालण से खरीदा। जिसको लेकर ठाट-बाट से रसोई बनाकर ब्राह्मण को भोजन करवाया।सभी ब्राह्मणने मुझे खूब आशीर्वाद दिया।राम बाई ने राजा को सभी बात बतायी। जब राजा ने कहा कि राम के लेखे से कार्तिक स्नान करने पर इतना पुण्य होता है तो सारे राज्य में हेरा फिराया कि सभी जने सुबह जल्दी उठकर कार्तिक स्नान करना। हे! कार्तिक माता! जैसे राम बाई पर मेहरबान हुए, वैसे ही सभी पर मेहरबान होना। नमस्कार दोस्तों 🙏🙏 कहानी कहने के बाद लप्सी तपसी की कहानी कही जाती है :- https://youtu.be/uGxyeQYBpDk धर्मराज जी की कथा :- https://youtu.be/1YWqt_pkBlE धर्मराज की कथा :- https://youtu.be/6ApM6NRj2RU राम लक्ष्मण की कहानी :- https://youtu.be/e4ArMg3L7Ic राई की कहानी :- https://youtu.be/jiAv03pF2uk सूरज भगवान की कहानी :- https://youtu.be/myymCNe8VUU सुखी अमावस्या की कहानी :- https://youtu.be/tv8U-slBQuI और Videos के लिये सब्सक्राइब करे : https://www.youtube.com/channel/UC6zU5hIzjDQ8I2jUxDFH5XQ?sub_confirmation=1 Facebook: - https://www.facebook.com/aryavat.ki.kahaniya/ Copyright Disclaimer: Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for "fair use" for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non-profit, educational, or personal use tips the balance in favor of fair use.

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