Kartik maas ki kahani | कार्तिक महिने की कहानी | Aryavart Ki Kahaniya

 


Kartik Mahine Ki Kahani | कार्तिक महिने की कहानी एक बूढ़ा था।जिसके चार बेटे की बहुएं थी। उसके घर वाली नहीं थी। कार्तिक का महिना आया।तब अपने बेटा की बहू को कहा कि मुझे कार्तिक स्नान करा दोगी क्या? सबसे पहले बड़ी बहू को कहा-जब बड़ी बह बोली कि ससुरजी मुझसे तो कार्तिक स्नान बन नहीं आयेगा। मेरे तो सुबह बच्चे स्कूल जाते हैं, उनको टिफिन तैयार करके स्कूल भेजना पड़ता है। मेरे तो वश की बात नहीं है। दूसरी बहू को पूछा तो उसने भी यहीं जबाव दिया।तीसरी बहू को कहा तो उसने कहा कि ससरजी कार्तिक स्नान कैसे करनी है? जब ससुरजी ने कहा-बहू सुबह पांच बजे उठकर बाल्टी धो-मांझ कर तालाब से पानी लेकर आना। कपड़े धोना, मेरे चाय-दूध बनाना और सुबह गर्म-गर्म खाना बनाकर भोजन करवाना। कार्तिक महिना पूरा होने के बाद ब्राह्मण भोजन करवाना। तीसरी बहु ने कहा कि सर्दी में कौन जल्दी उठेगा, कौन तालाब से बाल्टी भरकर लायेगा? ऐसा कहकर तीसरी बहु ने भी मना कर दिया। तब ससुरजी चौथी बहू के पास गये और कहा कि मुझे कार्तिक स्नान करवा दोगी क्या? ऊपर लिखे हुए ऐसे ही नित्य-कर्म बताए।तब चौथी बहू ने कहा कि ससुरजी मैं तो आपको स्नान करवा दूंगी, कपड़े धो कर सूखा दूंगी, चाय-दूध बनाकर दे दूंगी और गर्म-गर्म खाना बनाकर भोजन करवा दूंगी। ससुरजी तो प्रसन्न हो गए। बहू सुबह पांच बजे अंधर-अंधर बाल्टी धोकर तालाब से पानी भरकर लाकर देती ।ससुरजी स्नान कर लेते, जब बहू धोती धोकर ओरा में सूखा देती।छोटी बहू अपने पीहर में लाड़ली होने से उसको धोती पूरी निचोड़नी नहीं आती है। वह ओरे में झर-झरती धोती सूखा देती। ससुरजी की झर-झरती धोती झरे तबधोती से हीरा-मोती गिरे।फिर बहू खाना बनाकर ससुरजी को भोजन करवा देती। ससुरजी तो बहुत आशीर्वाद देवें। दूसरे दिन ससुरजी के स्नान करने के बाद धोती धोकर ओरा में सूखाने के लिये जाती है तोओरा में खूब हीरा-मोती पड़े होते हैं। बहू हीरे-मोती को उठाकर ऊपर रख देती है।ऐसे करते-करते कार्तिक महिने की पूर्णिमा आयी।ससुरजी ने बहू से कहा कि आज कार्तिक महिना पुरा हो गया है, मुझे ब्राह्मण भोजन करवाना है। बहू ने कहा-आप तो ब्राह्मण को कह कर आ जाओ।मैं तो खाना बना दूंगी और भोजन करवा दूंगी ।ससुरजी ने बहू से कहा कि पहले घर वाले को भोजन करवाते है.फिर ब्राह्मण को भोजन कराएंगे तो फल होता है। बहू ने कहा कि ससुरजी आप बड़े वाले बेटा-बहू और सभी बच्चों को कहकर आ जाओ कि आज सभी को मेरे यहां (छोटी बहू के घर ) भोजन करने के लिये आना है। बेटा-बहुएं और बच्चे सभी बह के घर भोजन करने के लिये आते हैं। छोटी बहू रसोई बनाकर खेत में चली जाती है। ससुरजी को कहती है कि आप ब्राह्मण को भोजन करवा कर आप सभी भोजन कर लेना।इतना कहकर वह खेत में चली गई। वहां पर भी चिड़ियां बहू का खेत चुग रही थी। बहू चिड़ियांको बोली!"आओ चिड़ियां"रामजी रो खेत, रामजी की चिड़ियां चुग जाओ खेत। वह तो चिड़ियां को भी यही बोली। पीछे से जेठानी आई। सभी भोजन करके हांडी पर उल्टा ढक्कन रख देती है और अपने घर चली जाती है। ससुरजी ने देखा कि रसोई में पीछे से कुछ भी नहीं बचा, देखे तो सभी हांडियां खाली पड़ी हैं और ढक्कन भी उल्टे रखे हुए हैं। तब ससुरजी विचार में पड़ गये।बहू खेत से वापिसआयेगी तब क्या भोजन करेगी?इस कारण सभी हांडियां के ढक्कन सीधे कर दिये और श्री दामोदर भगवान को याद किया और कहा कि हे दामोदर भगवान आप ही मेरी लाज रखना।शाम कोखेत में काम करके वापिस बहू घर पर आई।फिर ससुरजी से पूछा कि ब्राह्मण और घर वाले ने भोजन कर लिया क्या? ससुरजी डरते-डरते बोले कि हां बहू सभी ने भोजन कर लिया अब आप भी भोजन कर लो। मन में दामोदर भगवान को याद किया कि मैंने झूठ तो बोल दिया, लेकिन बहू भोजन क्या करेगी? हांडी में तो कुछ भी नहीं बचा। बह रसोई में जाकर ढक्कन उठाकर देखती है तो हांडीयों में वैसे की वैसे ही भरी हुई होती है। बहू ने ससुरजी को कहा कि आपने तो कहा कि सभी ने भोजन कर लिया।लेकिन यहां पर तो रसोई जैसी की जैसी पड़ी है।जब ससुरजी रसोई में आए और हांडियां देखकर बहू को सारी बात सच-सच बतायी। तब बहू को कहा कि तुमने सच्चे मन से मुझे कार्तिक स्नान करवाया।इस कारण दामोदर भगवान हमारे ऊपर प्रसन्न हुए है।जब बहू ने भी ससुरजी को ओरा में हीरा-मोती होने की बात भी बतायी। फिर बहू ने ससुरजी से कहा कि चलो ससुरजी हमखेत में से बाजरीके सिट्ठे भी लेकर आते हैं। खेत में गये तो बाजरी के सिट्ठे भी सोने के हो गये। सिट्ठा घर लेकर आए तो जेठानियां भी देखकर जल भुन गई और कहा कि ससुरजी ने कार्तिक स्नान करवाने से इतना फल व इतना धन होता है क्या? तीनों बहूएं बोली कि अगली साल ससुरजी को कार्तिक स्नान हम करायेंगे। ससुरजी आप हमारे साथ घर चलो। ससुरजी बोले-आपको ठण्डा-ठण्डा पानी लगेगा और आपसे जल्दी उठा नहीं जायेगा। नमस्कार दोस्तों 🙏🙏 कहानी कहने के बाद लप्सी तपसी की कहानी कही जाती है :- https://youtu.be/uGxyeQYBpDk धर्मराज जी की कथा :- https://youtu.be/1YWqt_pkBlE धर्मराज की कथा :- https://youtu.be/6ApM6NRj2RU राम लक्ष्मण की कहानी :- https://youtu.be/e4ArMg3L7Ic राई की कहानी :- https://youtu.be/jiAv03pF2uk सूरज भगवान की कहानी :- https://youtu.be/myymCNe8VUU सुखी अमावस्या की कहानी :- https://youtu.be/tv8U-slBQuI और Videos के लिये सब्सक्राइब करे : https://www.youtube.com/channel/UC6zU5hIzjDQ8I2jUxDFH5XQ?sub_confirmation=1 Facebook: - https://www.facebook.com/aryavat.ki.kahaniya/ Copyright Disclaimer: Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for "fair use" for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non-profit, educational, or personal use tips the balance in favor of fair use.

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