गणेश जी की कहानी | Ganesh Ji Ki Kahani | Aryavart Ki Kahaniya

 


Ganesh Ji Ki Kahani | गणेश जी की कहानी | Aryavart Ki Kahaniya

#aryavrat #kahaniya गणेश जी विघ्न विनाशक व शीघ्र प्रसन्न होने वाले देवता हैं। अगर कोई सच्चे मन से गणोश जी की पूजा पाठ करता है, गणेश जी तो तुरंत प्रसन्न होकर उसे आशीर्वाद प्रदान करते हैं। वैसे भी गणेश जी जिस स्थान पर निवास करते हैं, उनकी दोनों पत्नियां ऋद्धि तथा सिद्धि एवं उनके पुत्र शुभ व लाभ का आगमन भी गणेश जी के साथ ही होता है। कभी कभी तो भक्त भगवान को उल्जन में डाल देते हैं। पूजा-पाठ व भक्ति का जो वरदान मांगते हैं, वह निराला होता है। एक गांव में एक अंधी बुढ़िया रहती थी। वह गणेश जी की परम भक्त थी। वह सुबह शाम गणेश जी की भक्ति में लीन रहती । नित्य गणेश जी की मूर्ति के आगे बैठकर उनकी स्तुति व पूजा पाठ करती रहती थी । भजन गाती व समाधि में लीन रहती । गणेश जी बुढ़िया की भक्ति से बड़े प्रसन्न हुए। उन्होंने सोचा यह बुढ़िया नित्य हमारी पूजा पाठ करती है, परंतु बदले में कभी कुछ न मांगती। भक्ति का फल तो उसे मिलना ही चाहिए। ऐसा सोचकर गणेश जी एक दिन बुढ़िया को प्रत्यक्ष दर्शन दिए तथा बोले- 'माई, तुम हमारी सच्ची भक्त हो। जिस श्रद्धा व विश्वास से हमारी पूजा पाठ करती हो, हम उससे प्रसन्न हैं। अत: आप जो वरदान चाहो, हमसे मांग सकती हो।' बुढ़िया बोली- ' प्रभु! मैं तो आपकी भक्ति प्रेम भाव से करती हूं। मांगने का तो मैंने कभी सोचा ही नहीं। अत: मुझे कुछ नहीं चाहिए।' गणेश जी पुन: बोले- 'हम वरदान देने के लिए आए हैं।' बुढ़िया बोली- 'हे गोरी नंदन, मुझे मांगना तो नहीं आता। अगर आप कहें, तो मैं कल मांग लूंगी। तब तक मैं अपने बेटे व बहू से भी सलाह मश्विरा कर लूंगी। गणेश जी कल आने का वादा करके वापस लौट गए।' बुढ़िया का एक पुत्र व बहू थी । बुढ़िया ने सारी बात उन्हें बताकर सलाह मांगी । बेटा बोला- 'मां, तुम गणेश जी से ढेर सारा पैसा मांग लो। हमारी ग़रीबी दूर हो जाएगी। सब सुख चैन से रहेंगे।' बुढ़िया की बहू बोली- 'नहीं आप एक सुंदर पोते का वरदान मांगें। वंश को आगे बढ़ाने वाला भी, तो चाहिए।' बुढ़िया बेटे और बहू की बातें सुनकर उल्जन में पड़ गई। उसने सोचा- यह दोनों तो अपने-अपने मतलब की बातें कर रहे हैं। बुढ़िया ने पड़ोसियों से सलाह लेने का मन बनाया। पड़ोसन भी नेक दिल की थी। उसने बुढ़िया को समझाया कि तुम्हारी सारी जिंदगी दुखों में कटी है। अब शेष जीवन सुख से व्यतीत करो । धन अथवा पोते का तुम क्या करोंगी! अगर तुम्हारी आंखें ही नहीं हैं, तो यह संसारिक वस्तुएं तुम्हारे लिए व्यर्थ हैं। अत: तुम अपने लिए दोनों आंखें मांग लो।' बुढ़िया घर लौट आई। बुढ़िया और भी सोच में पड़ गई। उसने सोचा- कुछ ऐसा मांग लूं, जिससे मेरा, बहू व बेटे- सबका भला हो। लेकिन ऐसा क्या हो सकता है? इसी उल्जन में सारा दिन व्यतीत हो गया। बुढ़िया कभी कुछ मांगने का मन बनाती, तो कभी कुछ। परंतु कुछ भी निशचय न कर सकी। दूसरे दिन गणेश जी पुन: प्रकट हुए तथा बोले- 'आप जो भी मांगेंगे, वह हमारी कृपा से हो जाएगा । यह हमारा वचन है।' गणेश जी के पावन वचन सुनकर बुढ़िया बोली- 'हे गणराज, यदि आप मुझसे प्रसन्न हैं, तो कृप्या मुझे मन इच्छित वरदान दीजिए। मैं अपने पोते को सोने की गिलास में दूध पीते देखना चाहती हूं।' बुढ़िया की बातें सुनकर गणेश जी उसकी सादगी व सरलता पर मुस्कुरा दिए। बोले- ' आपने तो मुझे ठग ही लिया है। मैंने तुम्हें एक वरदान मांगने के लिए बोला था, परंतु आपने तो एक वरदान में ही सब कुछ मांग लिया। तुमने अपने लिए लंबी उम्र तथा दोनों आंखे मांग ली हैं। बेटे के लिए धन व बहू के लिए पोता भी मांग लिया। पोता होगा, ढेर सारा पैसा होगा, तभी तो वह सोने के गिलास में दूध पीएगा। पोते को देखने के लिए तुम जिंदा रहोगी, तभी तो देख पाओगी। अब देखने के लिए दो आंखें भी देनी ही पड़ेंगी।' फिर भी वह बोले- 'जो तुमने मांगा, वे सब सत्य होगा।' यूं कहकर गणेश जी अंर्तध्यान हो गए। सब कुछ पाकर गणेश जी की कृपा से बुढ़िया के घर पोता हुआ। बेटे का कारोबार चल निकला तथा बुढ़िया की आंखों की रौशनी वापस लौट आई। बुढ़िया अपने परिवार सहित सुख पूर्वक जीवन व्यतीत करने लगी। नमस्कार दोस्तों 🙏🙏 कहानी कहने के बाद लप्सी तपसी की कहानी कही जाती है :- https://youtu.be/uGxyeQYBpDk धर्मराज जी की कथा :- https://youtu.be/1YWqt_pkBlE धर्मराज की कथा :- https://youtu.be/6ApM6NRj2RU राम लक्ष्मण की कहानी :- https://youtu.be/e4ArMg3L7Ic राई की कहानी :- https://youtu.be/jiAv03pF2uk सूरज भगवान की कहानी :- https://youtu.be/myymCNe8VUU सुखी अमावस्या की कहानी :- https://youtu.be/tv8U-slBQuI और Videos के लिये सब्सक्राइब करे : https://www.youtube.com/channel/UC6zU5hIzjDQ8I2jUxDFH5XQ?sub_confirmation=1 Facebook: - https://www.facebook.com/aryavat.ki.kahaniya/

टिप्पणियाँ