Aakhir kyon ek raja ko karna pada garbh dharan ? | Aryavart Ki Kahaniya

 


Aakhir kyon ek raja ko karna pada garbh dharan ? || Aryavart Ki Kahaniya|| #aryavrat #kahaniya हज़ारों साल पहले हमारे पूर्वजों का ज्ञान, हमारे आज के ज्ञान की तुलना में कहीं उच्च था। विज्ञान के जिन चमत्कारों को देख कर हम आज हैरान होते है वो चमत्कार तो हमारे पूर्वजों ने हज़ारों साल पहले कर दिए थे, जैसे की पुरुष द्वारा गर्भधारण कर संतान को जन्म देना। आज हम आपको श्री राम के पूर्वज राजा युवनाश्व की कहानी बताएँगे, जिन्होंने स्वयं गर्भधारण करके अपनी संतान को जन्म दिया था जो की “चक्रवती सम्राट राजा मांधाता” के नाम से प्रसिद्ध हुई। रामायण के बालकाण्ड के अंतर्गत गुरु वशिष्ठ द्वारा भगवान श्री राम के कुल वर्णन किया गया है, जो इस प्रकार है – ब्रह्माजी के पुत्र मरिचि से कश्यप का जन्म हुआ। कश्यप के पुत्र थे विवस्वान। विवस्वान के पुत्र थे वैवस्त मनु, जिनके दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वांकु था। राजा इक्ष्वांकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और उन्होंने ही इक्ष्वांकु वंश को स्थापित किया। इसी वंश में राजा युवनाश्व का जन्म हुआ लेकिन उनका कोई संतान नहीं थी । पुत्र प्राप्ति की कामना लिए उन्होंने अपना सारा राज-पाठ त्याग कर वन में जाकर तपस्या करने का निश्चय किया। वन में अपने निवास के दौरान उनकी भेंट महर्षि भृगु के वंशज च्यवन ऋषि से हुई। च्यवन ऋषि ने राजा युवनाश्व के लिए इष्टि यज्ञ करना किया ताकि राजा की संतान जन्म ले। यज्ञ के बाद च्यवन ऋषि ने एक मटके में अभिमंत्रित जल रखा जिसका सेवन राजा की अर्धांगिनी को करना था ताकि वह गर्भधारण कर पाए। राजा युवनाश्व की संतान उत्पत्ति के उद्देश्य से हुए यज्ञ में कई ऋषि-मुनियों ने भाग लिया और यज्ञ के बाद सभी थकान की वजह से गहरी नींद में सो गए। अर्ध रात्रि के समय जब राजा युवनाश्व की नींद खुली तो उन्हे भयंकर प्यास लगी। युवनाश्व ने जल के लिए बहुत आवाज लगाई लेकिन थकान की वजह से गहरी नींद में सोने के कारण किसी ने राजा की आवाज नहीं सुनी। ऐसे में राजा स्वयं उठे और जल की तलाश करने लगे। राजा युवनाश्व को वह कलश दिखाई दिया जिसमें अभिमंत्रित जल था। इस बात से बेखबर कि वह जल किस उद्देश्य के लिए है, राजा ने प्यास की वजह से सारा जल पैन कर लिया। जब इस बात की खबर ऋषि च्यवन को लगी तो उन्होंने राजा से कहा कि उनकी संतान अब उन्हीं के गर्भ से जन्म लेगी । जब संतान के जन्म लेने का सही समय आया तब दैवीय चिकित्सकों, अश्विन कुमारों ने राजा युवनाश्व की कोख को चीरकर बच्चे को बाहर निकाला। बच्चे के जन्म के बाद यह समस्या उत्पन्न हुई कि बच्चा अपनी भूख कैसे मिटाएगा सभी देवतागण वहां उपस्थित थे, इतने में इंद्र देव ने उनसे कहा कि वह उस बच्चे के लिए मां की कमी पूरी करेंगे। इन्द्र ने अपनी अंगुली शिशु के मुंह में डाली जिसमें से दूध निकल रहा था और कहा “मम धाता” अर्थात मैं इसकी मां हूं। इसी वजह से उस शिशु का नाम ममधाता या मांधाता पड़ा। नमस्कार दोस्तों 🙏🙏 कहानी कहने के बाद लप्सी तपसी की कहानी कही जाती है :- https://youtu.be/uGxyeQYBpDk धर्मराज जी की कथा :- https://youtu.be/1YWqt_pkBlE धर्मराज की कथा :- https://youtu.be/6ApM6NRj2RU राम लक्ष्मण की कहानी :- https://youtu.be/e4ArMg3L7Ic राई की कहानी :- https://youtu.be/jiAv03pF2uk सूरज भगवान की कहानी :- https://youtu.be/myymCNe8VUU सुखी अमावस्या की कहानी :- https://youtu.be/tv8U-slBQuI और Videos के लिये सब्सक्राइब करे : https://www.youtube.com/channel/UC6zU5hIzjDQ8I2jUxDFH5XQ?sub_confirmation=1 Facebook: - https://www.facebook.com/aryavat.ki.kahaniya/ Copyright Disclaimer: Under Section 107 of the Copyright Act 1976, allowance is made for "fair use" for purposes such as criticism, comment, news reporting, teaching, scholarship, and research. Fair use is a use permitted by copyright statute that might otherwise be infringing. Non-profit, educational, or personal use tips the balance in favor of fair use.

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